सुप्रीम कोर्ट के 9 सदस्यीय बैंच द्वारा व्यक्तिगत गोपनीयता को पूर्ण अधिकार की श्रेणी से बाहर मानना परोक्ष रूप से संविधानिक मूलभूत अधिकारों की अवहेलना है।जहां एक ओर ऐसी वैधानिक अवधारणा अधिनायकवादी मानसिकता का प्रतीक है वही दूसरी ओर संविधान की ऐसी interpretation (व्याख्या) उन घिनौनी राजनीतिक शक्तियों को और सशक्त होने में सहायक होगी जो धर्म निरपेक्ष प्रजातंत्र की कभी पक्षधर नहीं रही, जो एक विशेष धर्म के वर्चस्व पर आधारित राजनीतिक,सामाजिक,आर्थिक तथा धार्मिक code of conduct (आचार संहिता) लागू करना चाहती है । यह भी एक सामाजिक त्रासदी है कि आज साधारण जनता में ऐसी व्याख्या के प्रति उदासीनता और संवेदनशीलता की कमी नज़र आती है जबकि इस विषय पर जागरूकता के साथ साथ गहन चिंतन की अत्यंत आवश्यकता है ।
Friday, 21 July 2017
Tuesday, 18 July 2017
Monday, 17 July 2017
व्यंग्य यथार्थ के आसपास ;
भगवा विचारक और अन्य बुद्धिवादी विपरीत बुद्धिवाद के पर्याय क्योंकर ?
चाणक्य नीति दर्पण में चाणक्य ने 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' मानसिकता का आधार सोने का हिरण बताया था जो न तो किसी ने देखा ,न सुना ,न किसी ने निर्माण किया परंतु फिर भी रघुनन्दन जैसा विवेकी उसके पीछे उसको पकडने के लिए गया .मुझे विश्वास है यदि चाणक्य के समय भगवा ब्रिगेड होता वह उनके व्यवहार और चिंतन को 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' का प्रेरणा स्त्रोत मानते .
प्रायः सोचता हूँ कि भगवा संस्कृति और चिंतन में ऐसा क्या है जो आधुनिक शिक्षा प्रणाली ,विशेष रूप से आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी में उच्च शिक्षा प्राप्त स्वयंसेवक उल्टी बुद्धि के प्रतीक और पर्याय बन जाते हैं ? जो २१वीं शताब्दी के नागरिक होकर भी पाषण युग के मानसिकता के चलते फिरते प्रचारक बन जाते हैं. जो hypocrisy [दोहरा मापदंड ] के प्रतीक के रूप में अपने दैनिक जीवन में जहाँ एक तरफ आधुनिक विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी का सब से अधिक लाभ उठाते हैं वहीं दूसरी तरफ तथाकथित प्राचीन बुद्धिवाद पर खोखले प्रवचन देते फिरते हैं .
*गाय ऑक्सीजन लेती है और ऑक्सीजन ही छोडती है तथा गाय मूत्र सर्वरोगहरं संजीवनी है .
*समस्त विश्व में जो भी साइंटिफिक अविष्कार आजतक आविष्कारित हैं वह मलेच्छों ने प्राचीन हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों से चुराये हैं .
* पावन देश भारत विश्वगुरु था ,विश्वगुरु है और समय अन्तराल तक विश्वगुरु रहेगा .
*महाभारत ,रामायण ,गीता ,वेद, उपनिषद ,पुराण,मनुस्मृति आदि आदि मिथात्मक काव्यात्मक ग्रन्थ न होकर वास्तविक इतिहास हैं और आज २१वीं शताब्दी में सार्थक और मार्गदर्शन है .
पिछले ४८ घंटों में तो असाधारण चमत्कार सामने आया है.
*भगवा शासित मध्य प्रदेश में रोगों का निदान एवं चिकित्सा अब डॉक्टर या वैद्य नहीं वरन तिलकधारी चोटीधारी ज्योतिषी करेंगे .चिकित्सा के फील्ड में अगला नोबल पुरस्कार विश्वगुरु भारत को मिलना तय है .
* टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुंबई एडिशन [१७ जुलाई २०१७] में प्रकाशित समाचार के अनुसार डॉ हर्षवर्धन& ,केन्द्रीय विज्ञान मंत्री ???] के निर्देशन में घठित उच्च अधिकार कमेटी #पंचगव्य [जो गाय मूत्र ,गाय गोबर,गाय दही ,गाय दूध तथा गाय घृत का दिव्य मिश्रण है ]की चिकित्सा तथा विज्ञान के अन्य सेक्टर में उपयोगिता पर गहन मंथन और विचार विमर्श कर रही है .मुझे पूरा विश्वास है कि यदि यह कमेटी रोग प्रतिरोधक vaccines की तुलना में दिव्य पंच गव्य की उपयोगिता स्थापित कर पाये तो चिकित्सा विज्ञान के फील्ड में पावन देश भारत का नोबल पुरस्कार भी मिलना तय है .
*डॉ हर्षवर्धन,MBBS, MS ,ENT Specialist !
भगवा विचारक और अन्य बुद्धिवादी विपरीत बुद्धिवाद के पर्याय क्योंकर ?
चाणक्य नीति दर्पण में चाणक्य ने 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' मानसिकता का आधार सोने का हिरण बताया था जो न तो किसी ने देखा ,न सुना ,न किसी ने निर्माण किया परंतु फिर भी रघुनन्दन जैसा विवेकी उसके पीछे उसको पकडने के लिए गया .मुझे विश्वास है यदि चाणक्य के समय भगवा ब्रिगेड होता वह उनके व्यवहार और चिंतन को 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' का प्रेरणा स्त्रोत मानते .
प्रायः सोचता हूँ कि भगवा संस्कृति और चिंतन में ऐसा क्या है जो आधुनिक शिक्षा प्रणाली ,विशेष रूप से आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी में उच्च शिक्षा प्राप्त स्वयंसेवक उल्टी बुद्धि के प्रतीक और पर्याय बन जाते हैं ? जो २१वीं शताब्दी के नागरिक होकर भी पाषण युग के मानसिकता के चलते फिरते प्रचारक बन जाते हैं. जो hypocrisy [दोहरा मापदंड ] के प्रतीक के रूप में अपने दैनिक जीवन में जहाँ एक तरफ आधुनिक विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी का सब से अधिक लाभ उठाते हैं वहीं दूसरी तरफ तथाकथित प्राचीन बुद्धिवाद पर खोखले प्रवचन देते फिरते हैं .
*गाय ऑक्सीजन लेती है और ऑक्सीजन ही छोडती है तथा गाय मूत्र सर्वरोगहरं संजीवनी है .
*समस्त विश्व में जो भी साइंटिफिक अविष्कार आजतक आविष्कारित हैं वह मलेच्छों ने प्राचीन हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों से चुराये हैं .
* पावन देश भारत विश्वगुरु था ,विश्वगुरु है और समय अन्तराल तक विश्वगुरु रहेगा .
*महाभारत ,रामायण ,गीता ,वेद, उपनिषद ,पुराण,मनुस्मृति आदि आदि मिथात्मक काव्यात्मक ग्रन्थ न होकर वास्तविक इतिहास हैं और आज २१वीं शताब्दी में सार्थक और मार्गदर्शन है .
पिछले ४८ घंटों में तो असाधारण चमत्कार सामने आया है.
*भगवा शासित मध्य प्रदेश में रोगों का निदान एवं चिकित्सा अब डॉक्टर या वैद्य नहीं वरन तिलकधारी चोटीधारी ज्योतिषी करेंगे .चिकित्सा के फील्ड में अगला नोबल पुरस्कार विश्वगुरु भारत को मिलना तय है .
* टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुंबई एडिशन [१७ जुलाई २०१७] में प्रकाशित समाचार के अनुसार डॉ हर्षवर्धन& ,केन्द्रीय विज्ञान मंत्री ???] के निर्देशन में घठित उच्च अधिकार कमेटी #पंचगव्य [जो गाय मूत्र ,गाय गोबर,गाय दही ,गाय दूध तथा गाय घृत का दिव्य मिश्रण है ]की चिकित्सा तथा विज्ञान के अन्य सेक्टर में उपयोगिता पर गहन मंथन और विचार विमर्श कर रही है .मुझे पूरा विश्वास है कि यदि यह कमेटी रोग प्रतिरोधक vaccines की तुलना में दिव्य पंच गव्य की उपयोगिता स्थापित कर पाये तो चिकित्सा विज्ञान के फील्ड में पावन देश भारत का नोबल पुरस्कार भी मिलना तय है .
*डॉ हर्षवर्धन,MBBS, MS ,ENT Specialist !
1) पतंजलि के ये सिक्योरिटी गार्ड ख़ास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार होंगे, जो दौड़ने-भागने के बजाय सुबह-शाम योग करेंगे और अपने ड्यूटी-स्थल पर बगल में चटाई दबाकर पहुंचेंगे।
2) इनके हाथ में गन के बजाय गिलोय का डंडा होगा। ये डंडा जिसको भी पड़ेगा, उसकी बॉडी में देशभक्ति की भावना का संचार ऑटोमेटिक हो जायेगा।
3) मॉल में आने वाले लोगों को ये बॉडी स्कैनर से चेक करने के बजाय नज़रों से ही चेक करेंगे। वे अपराधियों को शक्ल और कपड़े देखकर ही पहचान लेंगे।
4) ये गार्ड होने के साथ-साथ पतंजलि के सेल्समैन का काम भी करेंगे। ये चेकिंग के अलावा गेट पर शैंपू और दंतकांति भी बेचेंगे।
5) जो लोग प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक नहीं होंगे, उन्हें मॉल में एंट्री नहीं करने देंगे। और जो ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाएंगे, उन्हें सबसे पहले एंट्री कराएंगे।
6) ये अपराधियों को पकड़कर पतंजलि के नूडल्स खिलाएंगे। अगर उन्हें खाकर भी अपराधी बेहोश नहीं हुआ तो फिर उसे पतंजलि का कोई दूसरा प्रोडक्ट खिलाएंगे।
7) ये गार्ड्स बीफ़ के चेक करने में एक्सपर्ट होंगे और सिर्फ़ सूँघकर ही बता देंगे कि किसी चीज़ का माँस है। इसके लिये बाबाजी इन्हें ख़ुद सूँघने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
इन ख़ूबियों को गिनाने के बाद बाबाजी उठकर चलने लगे तो एक पत्रकार ने पूछ लिया कि “क्या आप इसमें गौ-रक्षकों को भी भर्ती करेंगे?”, तो वो हँसते हुए बोले- “हाँ! उन्हें भर्ती में वरीयता मिलेगी। प्रति पिटाई के हिसाब से उन्हें बोनस प्वॉइंट मिलेंगे और उनकी सैलरी भी औरों से ज़्यादा होगी।”
भारत और संसार के कमोबेश सभी पढ़े-लिखे लोग हमारे नोबेल-पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को जानते हैं। वह सिर्फ इकॉनमिस्ट नहीं हैं बल्कि लेखक-बुद्धिजीवी भी हैं और अंग्रेजी तथा अपनी मातृभाषा में बढ़िया लिखते हैं। यहां यह सूचित करना अनिवार्य है कि वह एक सेक्युलर और प्रगतिशील चिंतक हैं और किसी तरह की दकियानूसियत में कतई विश्वास नहीं करते। यह स्वाभाविक है कि ऐसे व्यक्तित्व पर कई वर्षों में फैली हुई एक डॉक्युमेंट्री फिल्म बने जो पूरे संसार में देखी और सराही जाए।
यूं तो इस पर किसी को या भारत की बीजेपी सरकार को क्या ऐतराज हो सकता था लेकिन सेंसर बोर्ड के कोलकता ऑफिस ने अंग्रेजी में बनी इस फिल्म में छह संगीन आपत्तियां निकाल डालीं। सेंसर ने कहा कि अमर्त्य सेन ने फिल्म में अंग्रेजी में ‘गुजरात’, ‘काउ’ (गाय), ‘हिंदू इंडिया’ और ‘हिंदुत्व व्यू ऑफ इंडिया’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो आपत्तिजनक हैं। सेंसर ने वृत्तचित्र के निर्माता-निदेशक सुमन घोष से कहा है कि इन शब्दों को या तो निकाल दें या उन पर आवाज का धीमा करने वाला पर्दा डाल दें, जैसा आजकल कभी-कभी टेलीविजन और फिल्मों पर किया जाता है।
Saturday, 15 July 2017
Quran violates Human Rights
Men are created one step higher than women (Quran 2.228)
Disbelievers (non-Muslims) are an open enemy to believers (Muslims) (Quran 4:101)
Kill the disbelievers wherever we find them. Quran (2:191)
Freedom of speech is prohibited and punishable by Quran
Witness of 2 women equals Witness of 1 man (Quran 2.282)
Fight those who believe not in Allah nor the Last Day ... " (Quran 9.29)
Disbelievers (non-Muslims) are an open enemy to believers (Muslims) (Quran 4:101)
Kill the disbelievers wherever we find them. Quran (2:191)
Freedom of speech is prohibited and punishable by Quran
Witness of 2 women equals Witness of 1 man (Quran 2.282)
Fight those who believe not in Allah nor the Last Day ... " (Quran 9.29)
Friday, 14 July 2017
चौरासी लाख योनियों की मिथात्मक गप्प !
जब कभी भी हम धार्मिक महाराथिओं से ८४ लाख योनियों के संदर्भ में दो या तीन दर्जन योनियों को गिनने को कहते हैं तो उनकी गिनती १५ से २५ के आसपास थम जाती है और बोलती बंद हो जाती है .वास्तव में जिस किसी लेखक ने यह कपोलकल्पित मिथात्मक गप्प का सृजन किया वह शायद हज़ार तक गिनती गिनने में भी समर्थ न था .यह कहना तर्कसंगत ही होगा कि कथित सर्वज्ञों ने जीव विविधता की बात करते हुए ८४ लाख योनियों की ढींग हांकी है .व्योरा इस प्रकार है :-
*जलचर =९ लाख प्रकार .
*पक्षि =१० लाख प्रकार .
*पशु =२० लाख प्रकार .
* पेड पोधे=३० लाख प्रकार .
*कृमि =११ लाख प्रकार .
*मनुष्य =४ लाख प्रकार .
यह गिनती और वर्गीकरण का साधन क्या था यह जानकारी किसी के पास नहीं है लेकिन यह गणना बाल गंगाधर तिलक कृत गीता रहस्य के पृष्ट १८५ पर उपलब्ध है. यह गणना नितांत अविज्ञानिक और निराधार है तथा तुकबंदी की मिसाल है .
वर्तमान युग में जल थल और नभ के सब प्राणियों पेड पौधों आदि आदि का विशाल स्तर पर गहन तथा विस्तृत अध्ययन किया गया है.उसके अनुसार विभिन्न प्रजातियों की कुल गिनती १६,६८५७८ है. इस गणना में ४,१९३५५ पौधों की प्रजातियाँ तथा १२,४९२२३ मानव सहित जीवों की संख्या शामिल है .कुल मिलकर यह संख्या १७ लाख भी नहीं बनतीं .बाल गंगाधर तिलक का यह कहना बिलकुल सही प्रतीत होता है कि ८४ लाख योनियों की बात पौराणिक कल्पना लगती है .[संदर्भ :चार्वाक दर्शन }.
जब कभी भी हम धार्मिक महाराथिओं से ८४ लाख योनियों के संदर्भ में दो या तीन दर्जन योनियों को गिनने को कहते हैं तो उनकी गिनती १५ से २५ के आसपास थम जाती है और बोलती बंद हो जाती है .वास्तव में जिस किसी लेखक ने यह कपोलकल्पित मिथात्मक गप्प का सृजन किया वह शायद हज़ार तक गिनती गिनने में भी समर्थ न था .यह कहना तर्कसंगत ही होगा कि कथित सर्वज्ञों ने जीव विविधता की बात करते हुए ८४ लाख योनियों की ढींग हांकी है .व्योरा इस प्रकार है :-
*जलचर =९ लाख प्रकार .
*पक्षि =१० लाख प्रकार .
*पशु =२० लाख प्रकार .
* पेड पोधे=३० लाख प्रकार .
*कृमि =११ लाख प्रकार .
*मनुष्य =४ लाख प्रकार .
यह गिनती और वर्गीकरण का साधन क्या था यह जानकारी किसी के पास नहीं है लेकिन यह गणना बाल गंगाधर तिलक कृत गीता रहस्य के पृष्ट १८५ पर उपलब्ध है. यह गणना नितांत अविज्ञानिक और निराधार है तथा तुकबंदी की मिसाल है .
वर्तमान युग में जल थल और नभ के सब प्राणियों पेड पौधों आदि आदि का विशाल स्तर पर गहन तथा विस्तृत अध्ययन किया गया है.उसके अनुसार विभिन्न प्रजातियों की कुल गिनती १६,६८५७८ है. इस गणना में ४,१९३५५ पौधों की प्रजातियाँ तथा १२,४९२२३ मानव सहित जीवों की संख्या शामिल है .कुल मिलकर यह संख्या १७ लाख भी नहीं बनतीं .बाल गंगाधर तिलक का यह कहना बिलकुल सही प्रतीत होता है कि ८४ लाख योनियों की बात पौराणिक कल्पना लगती है .[संदर्भ :चार्वाक दर्शन }.
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