Monday, 31 August 2015

व्यंग्य, 
भाजपा (भारतीय भजन मण्डली पार्टी ) के असाधारण नवरत्न योगी आदित्य नाथ का नवीनतम् प्रवचन !
# बहुचर्चित योगी ने गोरखपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए दावा किया है कि वह केवल और केवल तीन घन्टे के भीतर अकेले विद्रोहीयों का नाश कर सकते हैं. इस असाधारण घोषणा ने विश्व कूटनीतिक /राजनीतिक क्षेत्रों को हिलाकर रख दिया है. कहा जा रहा है पाकिस्तान, चीन, अमरीका, जर्मनी, फ्रांस, इंगलैंड आदि कई देशों के शीर्षस्थ नेताओं की आंखों से नींद और मन का शान्ति गायब हो गई है. पूरा विश्व स्तब्ध है.
खोजी पत्रकारिता के अंतर्गत इस पत्रकार ने अत्यंत गोपनीय ढंग से योगी जी की असाधारण उपलब्धि का आधार ढूँढ लिया है. तीन दिवस पहले जब वह ब्रह्म वेला में वाल्मीकि रामायण के बाल कांड के अंतर्गत 40वें सर्ग का अध्ययन कर रहे थे तो उन्हें 30वें श्लोक में मुनि कपिलदेव के भस्मक विज्ञान की अनुभूति हुई. चूंकि इस दिव्य श्लोक में भस्मक विधि के बारे विस्तृत विवेचना नहीं थी अतः योगी जी ने अपनी असाधारण अध्यात्मिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए मुनि कपिलदेव की आत्मा को बुलाकर सम्सत ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात रक्षा और गृह मंत्रालय के शीर्षस्थ सूत्रों से विचार विमर्श किया. अब सरकार यह निर्णय लेगी कि योगी जी के दिव्य विज्ञान का प्रयोग पहले माओवादी विद्रोहीयों के विरुद्ध किया जाये या पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादियों के विरूद्ध. अगले सवा 11 घन्टों में अन्तिम निर्णय लिये जाने की प्रबल सम्भावना बताई जा रही है.
यहाँ यह बताना प्रासंगिक होगा कि भस्मक दिव्य ज्ञान के सौजन्य से केवल हुंकार मात्र से सभी विरोधी भस्म के ढेर में परिवर्तित हो जायेंगे.
जय हिंदू राष्ट्र !

Saturday, 29 August 2015

दृष्टिकोण, 
तसलीमा नसरीन को भारत की स्थाई नागरिकता मिलनी चाहिए !
# भारत का प्रगतिशील समाज तसलीमा को उपमहाद्वीप में तर्कशीलता और मानवतावाद के सशक्त प्रतीक के रूप में देखता है,जिस ने कई दशक पहले अकेले बंगलादेश में इस्लाम प्रेरित कट्टमुल्लापन ,संकीर्णता और रूढ़िवादिता के खिलाफ विद्रोह का झन्ड़ा बुलन्द किया और अपनी जान की परवाह न करके कठिनतम् परिस्थितियों में भी आज भी संघर्षरत है. वह भले ही लेखन कला में सलमान रूशदी के समानांतर नहीं है परन्तु उस ने अपनी योग्यता अनुसार अपनी लेखनकला का सकारात्मक प्रयोग किया है. वह भारतीय प्रजातन्त्र और धर्मनिरपेक्षता की प्रशंसक है और भारतीय वातावरण, विशेष रूप से पश्चिमी बंगाल में अपने आप को सहज महसूस करती है.
उस ने कभी भी इस्लामी कट्टरवाद के समक्ष न तो समर्पन किया है और न ही निज स्वार्थ (वह पेशे से डाक्टर है) के लिए किसी प्रकार का समझोता किया है. कई दशक पहले उस को अपना देश उस समय छोड़ना पड़ा जब तत्कालीन सरकार ने इस्लामी कट्टरवादियों के दबाव में उसकी सुरक्षा देने से साफ इन्कार किया,परन्तु मानवतावाद और प्रगतिशीलता की जो आधारशिला उस ने स्थापित की, जो आवाज़ बुलन्द की वह आज भी बंगलादेश में गूंज रही है. उन्हीं में से इस वर्ष पांच जाने माने बुद्धिवादियों की निर्मम ढंग से हत्या की गई.
किसी भी दृष्टिकोण से यह बात समझ से परे है कि ऐसी वीरांगना को भारत की स्थाई नागरिकता क्यों नहीं दी जा सकती है ?किन कारणों से वर्ष के 365 दिन उस के सिर पर अस्थाई वीज़ा की तलवार लटकती रहती है ?
यह एक राजनीतिक त्रासदी ही है कि अपने आप को प्रगतिशील वामपंथी परिभाषित करने वाले महारथियों ने आजतक कभी भी खुलकर उस का समर्थन नहीं किया है. वह खामोश क्यों हैं ?उन की धर्म निरपेक्ष क्रान्तिकारी शब्दावली और प्रगतिशीलता क्या एक धर्म विशेष की साम्प्रदायिकता और कट्टरवादिता के लिए ही सुरक्षित है? क्या मुस्लिम वोटबैंक क्रांतिकारी विचारधारा से भी अधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है?
वह पश्चिम बंगाल को अपने घर जैसा मानती है और अपना रचनात्मक समय अधिकतर वहां गुजारना चाहती है, परन्तु न तो अपनी राजसत्ता के समय वामपंथी कामरेडों ने उसे गले लगाया और न ही स्वयंभू नारी सशक्तिकरण की योद्धा ममता उस को गले लगाने को तैयार है. एकमात्र कारण: मुस्लिम वोटबैंक के लिए तुष्टिकरण. अभी अभी तसलीमा नसरीन को जो एक वर्ष का वीज़ा मोदी सरकार ने दिया है, उसकी पृष्ठभूमि में मोदी सरकार के अपने निहित राजनीतिक स्वार्थ हैं.

Friday, 28 August 2015

धार्मिक बाजारीकरण !
यदि आम आदमी राधे मां जैसे लोगों के प्रति आकर्षित होता है तो इसका कारण है कि मजहब को बहुत बड़े पैमाने के हाईटैक उद्यम का रूप दे दिया गया है। गत कुछ दशकों दौरान देश भर में ‘थीम पार्कों’ के रूप में कई नए मजहबी स्थल अस्तित्व में आ गए हैं और महंगे बाजारों और ज्वैलरी स्टोरों पर देवी-देवताओं की छोटी-बड़ी मूर्तियों की भरमार है। यहां तक कि फास्टफूड रैस्टोरैंट भी विभिन्न धार्मिक उत्सवों पर रैडीमेड भोजन उपलब्ध करवाते हैं और जन्माष्टमी उत्सव दौरान प्रसाद के रूप में ‘बर्थडे केक’ बांटा जाता है।
 
अतीत अभी भी हमारे अंग-संग है-हमारी वर्तमान दुनिया में दनदनाता है और धड़ल्ले से हस्तक्षेप करता है। इसका एक कारण यह है कि इसको ऐसे ‘कैप्सूल’ का रूप दे दिया है जो हमारे वर्तमान में पूरी तरह फिट होता है और हमारी आशाओं और अभिलाषाओं की दुनिया का अटूट अंग बन गया है। 
 
हम इस प्रक्रिया में हंसी-खुशी शामिल हुए हैं क्योंकि इस मेले में बाजारवाद और अध्यात्मवाद एकजुट हैं। हम धार्मिक ‘थीम पार्कों’ और धार्मिक टी.वी. सीरियल को तो प्यार करते हैं लेकिन उस व्यक्ति से आहत हो जाते हैं जो आध्यात्मिकता और बाजारवाद के रिश्ते को इसकी तार्किक परिणति तक विकसित करने का प्रयास करता है।
 
आखिर राधे मां ऐसा कौन-सा काम कर रही है जो हमारे पहले से धार्मिक जीवन का अंग नहीं है? उसके बारे में लोगों को वास्तव में इस बात से कोई परेशानी नहीं कि वह दौलत का फूहड़ प्रदर्शन करती है या बॉलीवुड जैसा व्यवहार करती है। हम ‘भगवान के अवतारों’ के ऐसे प्रपंच से पहले ही परिचित हैं और वास्तव में उनके इस रूप को आकर्षक मानते हैं क्योंकि इसमें हमारी अभिलाषाओं की झलक मौजूद है।
व्यथित मोदी जी पहुँचे निर्मल बाबा के दरबार, माँगा देश की समस्याओं का समाधान !
कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी के ‘सूट-बूट’ वाले कटाक्ष से सभी सांसद, पत्रकार और बुद्धजीवी अचम्भे में थें। आखिर एक ‘छोटा भीम’ देखने वाला सांसद इतना सटीक व्यंग्य कैसे कर सकता है? एकाएक हुआ उनका व्यक्तित्व विकास विस्मयकारक था। तदन्तर हुए फेकिंग न्यूज़ के ख़ुलासे से स्पष्ट हुआ कि अपने संसदीय अवकाश में राहुल गांधी निर्मल बाबा से मिलें और तभी से उनपर कृपाओं की असीम वृष्टि जारी है। आलम यह है कि तमाम नेताओं का निर्मल दरबार में ताँता लगना शुरू हो गया है।
इसी कड़ी में अपने अफ़ग़ानिस्तान के पाँचवे चरण के दौरे को रद्द कर, गुरुवार की रात मोदी निर्मल दरबार में पहुँचे।प्रस्तुत् है नरेन्द्र मोदी और निर्मल बाबा की वार्तालाप के कुछ अंश-
मोदी : इस अबोध भक्त का बाबा की चरणों में कोटि-कोटि वंदन!
बाबा : तुम अबोध कैसे हो सकते हो? आखिरकार तुम्हारे अपने भक्तों की फ़ेहरिस्त बड़ी लम्बी है! पूछो, क्या पूछना चाहते हो?
मोदी : बाबा जी, आजकल रूपया का कमज़ोर होना, महंगाई का बढ़ना, पाकिस्तान का हमारी 56 इंच की छाती पर चढ़ना और आए दिन विरोध प्रदर्शन, इन सबसे बहुत परेशान हूँ बाबा ,कोई उपाय बताईये ?
बाबा : तुम्हारी समस्या बहुत बड़ी है , उपाय भी अनेक करने होंगे। (थोड़ा सोचने के बाद) ये प्याज़ क्यों दिख रहा है भाई! याद करो आखिरी बार प्याज़ कब और कहाँ देखा था?
मोदी : बाबा जी, आज सुबह नाश्ते में प्याज़ के पकोड़े खायें थें। रोजाना ही खाता हूँ।
बाबा : एक कृपा तो यहाँ रुकी हुई है। खुद खाते हो और औरों को नहीं खिलाते! भाई, आम आदमियों को प्याज़ के पकोड़े खाने लायक बनाओ, कृपा आनी शुरू हो जाएगी!
मोदी : जी बाबा, अब प्याज नहीं खाऊंगा बल्कि आम जनता को खाने दूंगा।
मोदी : अच्छा बाबा जी, महंगाई का क्या करूँ?
बाबा : ये बताओं आखिरी बार किसानों से कब मिले थे?
मोदी : जी गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से पहले!
बाबा : एक कृपा तो यहाँ रुकी हुई है! इस बार किसानों की मन की बात को भी सुनना पड़ेगा।
मोदी : बाबी जी, पाकिस्तान तो बात करने से भी कतरा रहा है, ऐसे में मैं क्या करूँ, कैसे मिटेगा आतंकवाद?
बाबा : भाई, ये अनशन क्यों दिख रहा है! एक बार जंतर मंतर पर पूर्व सैनिकों से मिल आओ, एक कृपा वहां रुकी हुई है।
मोदी : जी बाबा जी! परुन्तु हार्दिक पटेल को कैसे ख़ुश कर सकता हूँ? वो तो आरक्षण की मांग पर अडिग है।
बाबा : सब शांत हो जायेंगे, बस बहन आनंदीबेन पटेल को राज धर्म निभाने की नसीहत मत देना! एक कृपा यहाँ से आयेगी।
मोदी : जी बाबा जी! परन्तु विपक्ष संसद में द्वेष के कारण अनावश्यक बाधा डाल रहा है, इसका क्या उपाय है?
बाबा : अगली बार से जब विपक्ष में होना तो तुम भी द्वेषवश अनावश्यक विरोध मत करना। समझे? एक कृपा यहाँ रुकी हुई है।
मोदी : बाबा जी, एक और आखिरी सवाल, बिहार के चुनावों में जीतने के लिए क्या उपाय है?
बाबा : ये खेल क्यों दिख रहा है भाई! कोई खेल तो नहीं खेलते?
मोदी : जी बाबा जी, कभी-कभी भोली जनता के साथ जुमलें खेल लेता हूँ!
बाबा : आज से जुमलें फेंकना बंद कर दो, कृपा आनी शुरू हो जाएगी!
मोदी : सदैव ऐसे ही अपनी कृपा मुझपर बनाएं रखियेगा, बाबा को कोटि-कोटि वंदन!
बाबा : भाई, जो तुमने काले धन वाले 15 लाख मेरे बैंक खाते में जमा करवाएं हैं, उसमे सिर्फ 50 दिन की कृपा होगी।
मोदी : बाबा जी , कृपया ऐसा ना करें। जैसे ही विदेशों से बाकि का काला धन लाऊंगा, आपको सवा लाख करोड़ रूपये चढाऊंगा।
बाबा : वाह! तुम्हारे इस वादे से, मैं बहुत प्रसन्न हूँ और 50 दिन की कृपा को बढ़ा रहा हूँ। बताओ कितना बढाऊं? 60 दिन? 70 दिन? 80 दिन? 90 दिन?
मोदी : बाबा! बाबा! बाबा! बाबा!
बाबा : मै पुरे दिन 125 दिनों की कृपा दे रहा हूँ, तुम्हारे उज्जवल भविष्य के लिए!
अध्यात्मवादी कहलाने का फैशन !
# हमारे कई परिचित जो हमारी नास्तिकतावादी तर्कशीलता क आगे अपने को बेबस पाते हैं तो बचाव की मुद्रा में कहते हैं -हम किसी प्रकार की धार्मिक आस्था से परे केवल अध्यात्मवादी (Spiritualist ) हैं. कमाल का विरोधाभास है. भला धर्म के बिना अध्यात्मवाद होता है क्या ?और फिर अध्यात्मवादी का सीधा सरल अर्थ है, आत्मा (धर्म का अभिन्न अंग)नामक काल्पित अस्तित्व के स्तर पर जीना अर्थात अपने को अभौतिक आत्मा समझना और भौतिक संसार की अच्छाई बुराई से ऊपर उठने का दावा (ढोंग).यह सब अव्यवहारिक है. व्यवहार में वही लोग दैनिक जीवन में लाभहानि पर विचार करते हैं, लेनदेन का सौदा करते हैं, भूख मिटाने के लिए भौतिक पदार्थों का उपयोग, संसारिक मोहमाया के साथ पूर्ण रूपेण लिप्त, वासनापूर्ती के लिए सदा तत्पर और प्रयत्नशील नज़र आते हैं. ऐसे शुद्ध रूप से भौतिकवादी अपने को अध्यात्मवादी कैसे परिभाषित कर सकते हैं. क्या यह दोहरा मापदण्ड (Hypocrisy) नहीं है? भगवा राज्य में साधु सन्यासी, स्वयंभू अध्यात्मवादी, भगवा वेशभूषा में सभी संसारिक भौतिक सुखों का आनंद लेकर भी अपने को शुद्ध अध्यात्मवादी कहते नहीं थकते.

Wednesday, 26 August 2015

व्यंग्य, 
मोदी भक्त की दुविधा /बेचारा डाक्टर कोमा में !
अच्छे दिनों की प्रतिक्षा, 
(देवदूत, विशेष संवाददाता की रिपोर्ट ).
16 मई 2014 के दिन जब भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिल गया, जिस के परिणामस्वरूप, प्रसन्नता की चरम सीमा में एक मोदी भक्त बेहोश होगया और कुछ समय बाद कोमा की स्थिति में चला गया. 15 मास के लम्बे अंतराल के बाद दो दिन पहले उसे बजरंगबली की कृपा से आश्चर्यजनक ढंग से जब होश आया, तो उस न डाक्टर से जिज्ञासास्वरूप पूछा :-
# अब आप भ्रष्टाचार मुक्त भारत में क्या महसूस कर रहे हैं?
# क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी जेल में बंद हैं या वह इटली भाग गये हैं?
# मुझे झुमरीतलया बुलेट ट्रेन में जाना चाहिए या बोईंग 707 में ?
# विदेशी बैंकों से कितना पैसा वापस आया है?
# प्रत्येक भारतीय नागरिक के खाते में 15-15 लाख जमा होने के बाद, क्या मोदी जी की कृपा से देश गरीबी मुक्त हो गया है?
# क्या अमरीकी डालर 35 रूपया के समानांतर हो गया है?
# कुकिंग गैस, सब्जियों, टमाटर, प्याज़ और आलू पर मोदी जी की सब्सडी स्कीम से क्या सभी देशवासी प्रसन्न हैं ?
# पाकिस्तान ने डरकर जब दाऊद इब्राहिम को भारत के हवाले किया, तो उस का क्या बना?
# किसानों को जब सारी ज़मीनें लौटाई गई हैं, तो क्या किसान खुश हैं?
# क्या सेवानिवृत सैनिक एक रेंक एक पेंशन मिलने पर खुश हैं ?
* यह सब प्रश्न सुनने के बाद डाक्टर कोमा की स्थिति में चला गया है जबकि भक्त को मानसिक असन्तुलन के कारण आगरा के मानसिक रोग हास्पिटल में भर्ती किया गया है.
*Waiting for Achhe Din*

*After the BJP won the elections with a full majority on 16 May, 2014, a
Modi fan fainted with happiness and went into coma. After 15 months, he
suddenly came out from the coma. Returning to his senses he asked the
following questions to the attending doctor.*

*How do you feel in "corruption free India"?*

*Are Rahul and Sonia Gandhi in jail or have they escaped to Italy?*

*Should I book a bullet train ticket to Lucknow or should I go by plane*

*How much black money did we get back from Swiss Banks?*

*After the Rs 15 lakh every Indian received from Modiji, there must be "no
poverty".*

*Has the US dollar dropped to Rs 35?*

*How happy are Indians after Modiji subsidised cooking gas, vegetables,
tomatoes, onions and potatoes?*

*After Pakistan got frightened and returned Dawood Ibrahim, what happened
to him?*

*Are farmers happy now that the land forcibly acquired by the Congress, has
been returned to them?*

*Have the Armed Forces got One Rank One Pension?*

*Listening to these questions, the poor doctor has gone into a coma, and
the Modi fan was sent to a mental asylum.*